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सामान्यत: पुछे जानॆ वालॆ सवाल‌
 ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के लिए व्यापम द्वारा ली गई संयुक्त उपयंत्री चयन परीक्षा अप्रैल 2012 के चयनित एवं प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों के लिए आवश्यक सूचना  
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
भारत के संविधान के 73 वें संशोधन के अनुरूप प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को सफल बनाने,विकास योजनाओं को मूर्तरूप दिया जाकर लोकतंत्रीय ग्रामीण स्थानीय व्यवस्था और जनभागिदारी को सुदृड़ करना, आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय के लिये संविधान की 11 वीं अनुसूची में वर्णित विषयों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन,अनुश्रवण एवं प्रबधंन के बारे में पदाधिकारियों को समुचित मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षण देना एवं पंचायतों को उनके अधिकार,कर्त्यव्य एवं दायित्वों को परिचित कराकर प्रदेश में ग्रामीण विकास त्वरित गति से हो ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करना ।

मध्यपदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को तत्कालीन महाकौशल , छत्तीसगढ़ , मध्यभारत , भोपाल , विंन्ध्यप्रदेश तथा राजस्थान के सबडिवीजन सिंरोज को मिलाकर किया गया । विभिन्न घटकों में पंचायतराज व्यवस्था से संबंधित पृथक-पृथक कानून/व्यवस्थाऐं प्रचलित थी । प्रदेश में पंचायत राज व्यवस्था में एक रूपता लाने की दृष्टि से वर्ष 1962 मे मध्यप्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1962 बनाया गया । प्रदेश में पंचायत व्यवस्था को और अधिक सशक्त कारगर बनाने की दृष्टि से समय-समय पर आवश्यक संशोधन कर वर्ष 1981 तथा 1990 में नये पंचायत अधिनियम बनाये गये ।

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संविदा नीति  
RES State SoR as on 12th April 2010
जिला पंचायत
संकल्प 2010
 
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  डिस्क्लेमर (Disclaimer)
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के पास सर्वाधिकार सुरक्षित आकल्पन,संधारण क्रिस्प भोपाल द्वारा